
Section 118 BNS in Hindi किसी ने चाकू मारा। किसी ने तेजाब फेंका। किसी ने जलती हुई छड़ से वार किया।
यह सिर्फ मारपीट नहीं है। यह धारा 118 BNS है — और इसकी सजा उम्रकैद तक जा सकती है।
अगर आप या आपका कोई जानकार इस धारा में फंसा है — या आप victim हैं और जानना चाहते हैं कि कानून आपके पक्ष में क्या करेगा — तो यह article आपके लिए है।
हम यहाँ cover करेंगे:
- Section 118 BNS क्या है और कब लगती है
- पुरानी IPC की कौन सी धाराएं replace हुईं
- Dangerous Weapon का मतलब क्या है (और क्या पत्थर भी dangerous weapon है?)
- दोनों sub-sections में सजा का फर्क
- जमानत मिलेगी या नहीं — और कैसे मिलेगी
- FIR और गिरफ्तारी का process
- हाल के Supreme Court और High Court के फैसले
- और सबसे जरूरी FAQs
Section 118 BNS क्या है? — एक नजर में
Section 118 – Voluntarily causing hurt or grievous hurt by dangerous weapons or means.
- Whoever, except in the case provided for by sub-section (1) of section 120, voluntarily causes hurt by means of any instrument for shooting, stabbing or cutting, or any instrument which, used as a weapon of offence, is likely to cause death, or by means of fire or any heated substance, or by means of any poison or any corrosive substance, or by means of any explosive substance or by means of any substance which it is deleterious to the human body to inhale, to swallow, or to receive into the blood, or by means of any animal, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, or with fine which may extend to twenty thousand rupees, or with both.
- Whoever, except in the case provided for by sub-section (2) of section 120, voluntarily causes grievous hurt by any means referred to in sub–section (1), shall be punished with imprisonment for life, or with imprisonment of either description for a term which shall not be less than one year but which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.
Section 118 BNS, Bharatiya Nyaya Sanhita 2023 की वो धारा है जो खतरनाक हथियारों या खतरनाक तरीकों से जानबूझकर चोट पहुंचाने पर लागू होती है।
पुरानी IPC में यह दो अलग-अलग धाराएं थीं:
- IPC Section 324 → अब BNS Section 118(1) (हथियार से साधारण चोट)
- IPC Section 326 → अब BNS Section 118(2) (हथियार से गंभीर चोट)
BNS ने दोनों को एक धारा में मिला दिया — लेकिन सजा को और कड़ा बना दिया।
Vocabulary: Dangerous Weapon = खतरनाक हथियार — वो चीज जो आसानी से जान ले सकती है या गंभीर नुकसान कर सकती है। Grievous Hurt = गंभीर चोट — जैसे हड्डी टूटना, आंख जाना, स्थायी विकलांगता।
Section 118 BNS का पूरा Text — Bare Act (हिंदी में)
Section 118(1): जो कोई भी — Section 122(1) के मामलों को छोड़कर — जानबूझकर निम्नलिखित खतरनाक माध्यमों से किसी को चोट पहुंचाए:
- गोली चलाने, छुरा मारने या काटने के हथियार से (बंदूक, चाकू, तलवार, कैंची)
- ऐसे किसी हथियार से जो मारने पर जान लेने में सक्षम हो
- आग या किसी गर्म पदार्थ से
- किसी जहर या तेजाब जैसे corrosive substance से
- किसी विस्फोटक पदार्थ (explosive) से
- सांस लेने, निगलने या खून में मिलने पर नुकसानदायक पदार्थ से
- किसी जानवर के जरिए
तो उसे 3 साल तक की कैद या ₹20,000 तक जुर्माना या दोनों की सजा होगी।
Section 118(2): जो कोई भी — Section 122(2) के मामलों को छोड़कर — उपरोक्त किसी भी खतरनाक माध्यम से गंभीर चोट (Grievous Hurt) पहुंचाए, उसे:
- आजीवन कारावास (Life Imprisonment), या
- कम से कम 1 साल और अधिकतम 10 साल की कैद + जुर्माना
की सजा होगी।
बड़ा बदलाव: पुरानी IPC Section 326 में minimum sentence नहीं था। BNS ने न्यूनतम 1 साल की सजा अनिवार्य कर दी। अब Judge चाहे भी तो 1 साल से कम सजा नहीं दे सकता।
खतरनाक हथियार (Dangerous Weapon) क्या होता है?
यह सबसे जरूरी सवाल है — क्योंकि इसी पर निर्भर करता है कि 115(2) BNS लगेगी या 118 BNS।
Section 118 BNS में “Dangerous” माने जाने वाली चीजें:
| Category | उदाहरण |
| काटने-छुरा मारने के हथियार | चाकू, कैंची, तलवार, दरांती, कांच का टुकड़ा |
| गोली चलाने के हथियार | बंदूक, पिस्तौल, देशी कट्टा |
| मृत्यु करने में सक्षम हथियार | लोहे की रॉड, भारी पत्थर (case-by-case), हथौड़ा |
| आग या गर्म पदार्थ | जलता हुआ तेल, गर्म पानी, मशाल |
| जहर या तेजाब | एसिड, corrosive chemicals |
| विस्फोटक | पटाखे का जानलेवा इस्तेमाल, बम |
| जानवर | कुत्ता लगवाना, सांप छुड़वाना |
क्या पत्थर Dangerous Weapon है? — Court का जवाब
यह सबसे अक्सर पूछा जाने वाला सवाल है।
Kerala High Court ने Kumaran v. State of Kerala (2025) में स्पष्ट किया कि पत्थर अपने आप में खतरनाक हथियार नहीं होता — लेकिन अगर उसके आकार, नुकीलेपन और इस्तेमाल के तरीके से मौत या गंभीर चोट हो सकती है, तो वो Section 118 BNS के दायरे में आएगा। उस मामले में पत्थर से चेहरे की हड्डी टूटी थी — इसलिए Court ने Section 326 IPC (अब 118 BNS) के तहत conviction बरकरार रखी।
सरल नियम: हथियार की category नहीं, उसके इस्तेमाल का तरीका और उससे हुई चोट तय करेगी कि 118 लगेगी या नहीं।
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IPC और BNS में क्या बदला? — तुलनात्मक तालिका
| पहलू | IPC 324 (पुरानी) | IPC 326 (पुरानी) | BNS 118(1) (नई) | BNS 118(2) (नई) |
| चोट का प्रकार | साधारण (hurt) | गंभीर (grievous) | साधारण (hurt) | गंभीर (grievous) |
| हथियार | जरूरी | जरूरी | जरूरी | जरूरी |
| Cognizable? | हां | हां | हां | हां |
| Bailable? | हां (पुराने में) | नहीं | नहीं (बड़ा बदलाव!) | नहीं |
| अधिकतम सजा | 3 साल | 10 साल | 3 साल | उम्रकैद |
| न्यूनतम सजा | कोई नहीं | कोई नहीं | कोई नहीं | 1 साल (नया!) |
| अधिकतम जुर्माना | ₹1,000 | कोई सीमा नहीं | ₹20,000 | कोई सीमा नहीं |
| Compoundable? | नहीं | नहीं | नहीं | नहीं |
⚠️ सबसे बड़ा झटका — IPC 324 Bailable था, BNS 118(1) Non-Bailable है
यह BNS का सबसे बड़ा और सबसे चौंकाने वाला बदलाव है। पुरानी IPC Section 324 में हथियार से साधारण चोट के लिए जमानत का अधिकार था। लेकिन BNS Section 118(1) में अब यह Non-Bailable हो गया है — यानी जमानत अधिकार नहीं, बल्कि Court का विवेक है।
इसका मतलब है — किसी ने चाकू से खरोंच भी लगाई और चोट grievous नहीं हुई — तब भी आरोपी को जमानत के लिए Court के सामने argue करना होगा। Police station से automatic bail नहीं मिलेगी।
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Section 118 BNS — Grievous Hurt क्या होता है?
Section 118(2) तब लागू होती है जब चोट Grievous हो। यह definition Section 116 BNS में दी गई है:
ये चोटें Grievous Hurt मानी जाती हैं:
- Emasculation — पुरुष की प्रजनन क्षमता को नष्ट करना
- किसी भी आंख की रोशनी स्थायी रूप से जाना
- किसी भी कान की सुनने की क्षमता स्थायी रूप से जाना
- कोई भी अंग या जोड़ का स्थायी रूप से नष्ट होना
- चेहरे या सिर का स्थायी विकृत (disfigure) होना
- हड्डी या जोड़ का टूटना या उखड़ना (fracture/dislocation)
- ऐसी चोट जो जीवन को खतरे में डाले या जिससे पीड़ित 20 दिन से ज्यादा काम करने में असमर्थ हो जाए
याद रखें: अगर इनमें से कोई भी चोट हथियार से लगी है — तो Section 118(2) BNS लागू होगी और सजा उम्रकैद तक जा सकती है।
जमानत — कब मिलेगी, कैसे मिलेगी?
Section 118(1) में जमानत
Section 118(1) Non-Bailable है — यानी जमानत अधिकार नहीं है। Court तय करेगी। लेकिन चूंकि चोट grievous नहीं है, Court आमतौर पर इन बातों पर विचार करेगी:
- आरोपी का criminal record है या नहीं
- weapon recover हुआ या नहीं
- victim की current medical condition
- क्या आरोपी फरार होने का खतरा है
Defense tip: अगर weapon recovery का video नहीं है (जो Section 105 BNSS में अनिवार्य है), तो bail application में यह तर्क बहुत काम आता है।
Section 118(2) में जमानत
यह अत्यंत कठिन है। Grievous hurt + dangerous weapon = Court बहुत सावधानी से देखती है। Bail मिलने के लिए:
- Strong surety (जमानतदार) जरूरी
- Victim को threat का खतरा न हो
- Medical evidence contest करने का आधार हो
- High Court में bail की संभावना ज्यादा
Anticipatory Bail: दोनों sub-sections Non-Bailable हैं, इसलिए अगर FIR होने की आशंका है — तुरंत Anticipatory Bail (Section 482 BNSS) के लिए apply करें।
धारा 115(2) BNS क्या है? | Section 115(2) BNS in Hindi — सजा, जमानत, FIR और कोर्ट प्रक्रिया (2026)
FIR और गिरफ्तारी — Police क्या करेगी?
Section 118 BNS पूरी तरह Cognizable है।
इसका मतलब:
- Police बिना Warrant के FIR लिख सकती है
- Police बिना Warrant के गिरफ्तार कर सकती है
- Police को Magistrate की permission लेने की जरूरत नहीं
Step-by-Step Process:
Step 1 — FIR: Complaint मिलते ही Police FIR दर्ज करेगी। यह Non-Cognizable Report (NCR) नहीं होगी — सीधे FIR।
Step 2 — Arrest: आरोपी को तुरंत गिरफ्तार किया जा सकता है। गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर Magistrate के सामने पेश करना अनिवार्य है।
Step 3 — MLC और Weapon: Victim का MLC (Medico-Legal Case) रिपोर्ट बनेगा। अगर हथियार मिलता है तो Section 105 BNSS के तहत उसकी Videography अनिवार्य है। बिना videography के weapon recovery कमजोर evidence मानी जाती है।
Step 4 — FSL: हथियार को Forensic Science Laboratory भेजा जाता है।
Step 5 — Chargesheet और Trial:
- Section 118(1) का Trial — कोई भी Magistrate
- Section 118(2) का Trial — Magistrate of First Class (Sessions Court नहीं, लेकिन serious cases में Sessions Court refer हो सकती है)
हाल के महत्वपूर्ण Court Judgements (2025-2026)
1. Kerala High Court — Kumaran v. State of Kerala (2025): पत्थर भी हथियार हो सकता है
Kerala High Court ने माना कि पत्थर खुद में dangerous weapon नहीं होता — लेकिन उसके आकार, नुकीलेपन और जिस तरह से इस्तेमाल किया गया उसके आधार पर उसे dangerous weapon माना जा सकता है। इस मामले में पत्थर से चेहरे की हड्डी टूटी थी, इसलिए Section 326 IPC (अब 118 BNS) के तहत conviction बरकरार रही।
Lesson: हर case में “dangerous weapon” की definition अलग-अलग होती है — सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि उसका इस्तेमाल और नतीजा देखा जाता है।
2. Supreme Court — Sudden Quarrel में Intent का महत्व
Supreme Court ने एक मामले में कहा कि अगर grievous hurt अचानक हुई झड़प में बिना किसी पूर्व योजना के हुई हो, तो accused पर Section 118(1) लगाई जा सकती है — Section 118(2) नहीं। यानी premeditation (पूर्व योजना) का अभाव सजा को कम कर सकता है।
3. Supreme Court — Medical Evidence अनिवार्य
Supreme Court ने यह भी स्पष्ट किया कि Grievous Hurt की category तय करने के लिए Medical Evidence जरूरी है और इसे सावधानी से देखा जाना चाहिए — क्योंकि इसी पर निर्भर करता है कि 118(1) लगेगी या 118(2)।
4. Mob Violence Case — सामूहिक जिम्मेदारी
एक mob lynching मामले में Court ने माना कि जब एक group dangerous weapons लेकर आया और grievous hurt हुई — तो हर सदस्य जिम्मेदार है, चाहे उसने खुद हथियार चलाया हो या नहीं। यह Collective Liability का सिद्धांत है।
BNS Section 336 Forgery in Hindi (दस्तावेजों की जालसाजी)
118(1) vs 118(2) — दोनों में मुख्य अंतर
| पहलू | Section 118(1) | Section 118(2) |
| चोट का प्रकार | साधारण (hurt) | गंभीर (grievous hurt) |
| हथियार | जरूरी | जरूरी |
| अधिकतम सजा | 3 साल | उम्रकैद |
| न्यूनतम सजा | कोई नहीं | 1 साल |
| Bail | Non-Bailable (Court decide करेगी) | Non-Bailable (बहुत कठिन) |
| Trial Court | कोई भी Magistrate | First Class Magistrate |
| जुर्माना | ₹20,000 तक | कोई ऊपरी सीमा नहीं |
| Compoundable? | नहीं | नहीं |
Section 118 में बचाव के रास्ते — Defense Strategy
अगर आप आरोपी हैं, तो एक अनुभवी वकील ये arguments ले सकता है:
1. Weapon को “Dangerous” चुनौती दो: Medical Officer से cross-examination में पूछें: “क्या यह चोट किसी नुकीले कोने से टकराने से भी हो सकती थी?” अगर हां — तो 118(1) कमजोर पड़ जाती है।
2. Weapon Recovery की Videography नहीं है? Section 105 BNSS के तहत weapon recovery की videography अनिवार्य है। अगर यह नहीं की गई, तो Chargesheet कमजोर है और Discharge या Acquittal की संभावना बढ़ती है।
3. Mutual Fight का तर्क: अगर आरोपी को भी चोट लगी हो, तो तुरंत cross-MLC करवाएं। यह मामले को “mutual fight” बनाता है जिससे bail आसान होती है।
4. Intent नहीं था — Sudden Provocation: अगर झगड़ा अचानक हुआ और कोई पूर्व योजना नहीं थी, तो Section 122 BNS (Provocation Exception) का तर्क लगाया जा सकता है जिससे सजा काफी कम हो सकती है।
5. Digital Evidence Challenge: अगर CCTV footage evidence में है लेकिन Section 63 BSA का Certificate नहीं है — तो उसे Court में challenge करें। Certificate के बिना digital evidence मान्य नहीं होती।
धारा 118 और धारा 115(2) BNS में फर्क — एक नजर में
| Section 115(2) BNS | Section 118 BNS | |
| हथियार जरूरी? | नहीं | हां |
| उदाहरण | थप्पड़, धक्का, मुक्का | चाकू, तेजाब, बंदूक |
| Bailable? | हां | नहीं |
| FIR होगी? | नहीं (NCR) | हां |
| Compoundable? | हां | नहीं |
| अधिकतम सजा | 1 साल | उम्रकैद (118(2) में) |
| Cognizable? | नहीं | हां |
Quick Reference Card — Section 118 BNS
| पहलू | 118(1) | 118(2) |
| पुरानी IPC धारा | 324 | 326 |
| चोट | Simple Hurt | Grievous Hurt |
| हथियार | अनिवार्य | अनिवार्य |
| Cognizable | हां | हां |
| Bailable | नहीं | नहीं |
| Compoundable | नहीं | नहीं |
| Trial | Any Magistrate | First Class Magistrate |
| अधिकतम सजा | 3 साल | उम्रकैद |
| न्यूनतम सजा | कोई नहीं | 1 साल |
| जुर्माना | ₹20,000 | Court decides |
BNS Section 82 in Hindi
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल — FAQ
Q1. क्या Section 118 BNS में Anticipatory Bail मिल सकती है? हां, मिल सकती है। चूंकि यह Non-Bailable Offence है, इसलिए FIR होने से पहले Anticipatory Bail (Section 482 BNSS) के लिए Sessions Court या High Court में apply करें। देरी मत करें।
Q2. क्या लोहे की रॉड से मारना 118 BNS में आता है? यह depend करता है। अगर रॉड इस तरह इस्तेमाल की गई कि वो जान ले सकती थी या गंभीर चोट हो सकती थी — तो हां, 118 BNS लगेगी। अगर हल्की चोट लगी और रॉड साधारण थी — तो 115(2) BNS लग सकती है।
Q3. क्या Acid Attack Section 118 में आता है? हां। Acid एक corrosive substance है जो Section 118 BNS में explicitly listed है। लेकिन Acid Attack के लिए एक अलग और और भी कड़ी धारा है — Section 124 BNS जो specifically acid attacks को cover करती है।
Q4. क्या जानवर से हमला करवाना 118 BNS में आता है? हां। Section 118 BNS में “किसी जानवर के जरिए” चोट पहुंचाना explicitly शामिल किया गया है — जैसे किसी पर जानबूझकर कुत्ता छोड़ना। यह IPC में इतने स्पष्ट रूप से नहीं था।
Q5. अगर चोट Grievous नहीं निकली तो क्या 118(2) हट जाएगी? हां। अगर MLC report में चोट “Simple Hurt” निकले, तो Section 118(2) नहीं लगेगी — 118(1) लगेगी। इसीलिए MLC report challenge करना defense की पहली strategy होती है।
Q6. क्या 118 BNS में समझौता (Compound) हो सकता है? नहीं। Section 118 BNS Non-Compoundable है। इसका मतलब है victim और accused चाहें तो भी Court के बाहर मामला खत्म नहीं कर सकते। State prosecution जारी रखेगी। हां, High Court में Section 528 BNSS के तहत quashing petition file की जा सकती है — लेकिन यह मुश्किल है।
Q7. Section 118 BNS में case कितने साल चलता है? अगर weapon है, FSL report है और trial full हो — तो 3 से 7 साल लग सकते हैं। जितनी जल्दी defense strategy बनाई जाए, उतना बेहतर।
Q8. अगर दोनों लड़ रहे थे और दोनों को चोट लगी — तो क्या होगा? दोनों पर FIR हो सकती है। लेकिन अगर यह साबित हो कि एक ने अचानक हथियार निकाला और दूसरा बचाव में था — तो self-defense (Section 34 BNS) का तर्क लगाया जा सकता है।
निष्कर्ष — Conclusion
Section 118 BNS Section 115(2) BNS से कहीं ज्यादा serious है।
फर्क सिर्फ एक है — हथियार।
हाथ से मारे तो 115(2) — जमानत मिलेगी, NCR होगी, समझौता हो सकता है।
हथियार उठाया तो 118 — FIR होगी, गिरफ्तारी होगी, जमानत अधिकार नहीं, समझौता नहीं।
इसीलिए — चाहे आप पीड़ित हों या आरोपी — बिना वकील के एक भी कदम मत उठाएं।
पीड़ित के लिए: तुरंत MLC करवाएं, FIR लिखवाएं, CCTV footage सुरक्षित करवाएं। आरोपी के लिए: FIR से पहले Anticipatory Bail apply करें, weapon recovery को challenge करें, MLC को contest करें।
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